"ऐ ज़िन्दगी" (रजनी माहर)
Wednesday, 28 September 2011
ऐ ज़िन्दगी आजा
अब मैदान में...
देखें....
किसमें कितना है दम?
जब तू नहीं कम,
तो हम भी नहीं कम!
तेरे पास तो-
देने के लिए हैं ग़म,
हमारे जिगर में-
उसे सहने का है दम!
माना काँटों भरा है-
जीवन का रास्ता,
तो फूलों से-
क्या रखना वास्ता!!
4 comments:
बहुत चुनौतीभरी रचना लिखी है आपने तो!
सुन्दर अभिव्यक्ति!
सकारात्मकता से भरी रचना ......
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