Related Posts with Thumbnails

"ऐ ज़िन्दगी" (रजनी माहर)

Wednesday, 28 September 2011

ऐ ज़िन्दगी आजा 
अब मैदान में...
देखें....
किसमें कितना है दम?
जब तू नहीं कम,
तो हम भी नहीं कम!
तेरे पास तो-
देने के लिए हैं ग़म,
हमारे जिगर में-
उसे सहने का है दम!
माना काँटों भरा है-
जीवन का रास्ता,
तो फूलों से-
क्या रखना वास्ता!!

2 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 29 September 2011 at 09:02  

बहुत चुनौतीभरी रचना लिखी है आपने तो!
सुन्दर अभिव्यक्ति!

avanti singh 23 November 2011 at 06:34  

सकारात्मकता से भरी रचना ......

Post a Comment

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

अब मेरे सभी ब्लॉग्स का पता इस प्रकार रहेगा
(शब्दों का दंगल) http://uchcharandangal.uchcharan.com
(उच्चारण) http://uchcharan.uchcharan.com
(मयंक) http://powerofhydro.uchcharan.com
(नन्हे सुमन) http://nicenice-nice.uchcharan.com
(बाल चर्चा मंच) http://mayankkhatima.uchcharan.com
(चर्चा मंच) http://charchamanch.uchcharan.com
(अमर भारती) http://bhartimayank.uchcharan.com
E-MAIL
rcshashtri@uchcharan.com

My Blog List

  © Blogger template Brownium by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP