श्रीमती रजनी के अन्तर्मन के कुछ भावः
Monday, 23 February 2009
जिन्दगी
जिन्दगी धूप ही धूप है,
छाँव का नाम-औ-निशां नही।
जिन्दगी एक पतझड़ है,
बसन्त का नाम-औ-निशां नही।
जिन्दगी सेज है काँटों की,
जहाँ फूलों का नाम-औ-निशां नही।
जिन्दगी आँसुओं का सैलाब है,
यहाँ मुस्कान का नाम-औ-निशां नही।
जिन्दगी निराशा का नाम है,
यहाँ आशा का नाम-औ-निशां नही।
जिन्दगी एक नफरत है,
यहाँ प्यार का नाम-औ-निशां
जिन्दगी एक नदिया है,
जहाँ साहिल का नाम-औ-निशां नही।