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Sunday, 14 October 2012

सभी मित्रों को
नवरात्रि की
हार्दिक शुभकामनाएँ!

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"टीचर जी! मत पकड़ो कान" (काव्यानुवाद-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

Monday, 16 January 2012

काव्यानुवाद 
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

टीचर जी!
मत पकड़ो कान।
सरदी से हो रहा जुकाम।।

लिखने की नही मर्जी है।
सेवा में यह अर्जी है।।

ठण्डक से ठिठुरे हैं हाथ।
नहीं दे रहे कुछ भी साथ।।

आसमान में छाए बादल।
भरा हुआ उनमें शीतल जल।।

दया करो हो आप महान।
हमको दो छुट्टी का दान।।

जल्दी है घर जाने की।
गर्म पकोड़ी खाने की।।

जब सूरज उग जाएगा।
समय सुहाना आयेगा।।

तब हम आयेंगे स्कूल।
नहीं करेंगे कुछ भी भूल।।
मूल पाठ (श्रीमती रजनी माहर)
mat pakado kan hamare teacher je....
aaj bahut sardi hai....
kaanp rahe hai haath hamare ..
likhne kee nahi marji hai......
suraj ko dhak raha hai baadal..
dekho kitana bedardi hai......
daya karo aab choor do hamko ..
ghar jane ki jaldi hai......
aab to bas mummi ke hatho 
khani garam pakaudi hai.....
mat pakado kan hamare teacher jee ..
aaj bahut sardi hai...

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Wednesday, 28 September 2011

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"वफा करके दिखा देंगे" (रजनी माहर)

तू नहीं...
तो कोई और भी नही!
तेरे बिन...
जीकर दिखा देंगे!
काँटों पर...
चलकर दिखा देंगे!
आग में... 
जलकर दिखा देंगे!
जा बेवफा...
बेवफाई पे भी तेरी...
वफा करके दिखा देंगे!

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"ऐ ज़िन्दगी" (रजनी माहर)

ऐ ज़िन्दगी आजा 
अब मैदान में...
देखें....
किसमें कितना है दम?
जब तू नहीं कम,
तो हम भी नहीं कम!
तेरे पास तो-
देने के लिए हैं ग़म,
हमारे जिगर में-
उसे सहने का है दम!
माना काँटों भरा है-
जीवन का रास्ता,
तो फूलों से-
क्या रखना वास्ता!!

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सभी मित्रों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ..

सभी मित्रों को नवरात्रि की 
हार्दिक शुभकामनाएँ..

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"आँधी और आग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ' मयंक')

Monday, 18 April 2011

खटीमा (उत्तराखण्ड)
दिनांक-17.04.2011
समय- रात्रि 8.45
3 घण्टे तक भयंकर आँधी चलती रही
इतने लम्बे समय तक आँधी कभी नहीं आयी। 
गेहूँ के खेत जलकर भस्मीभूत हो गये। 
 दो मंजिले की छत पर भी
खेतों में लगी आग की गरमी
हम अनुभव कर रहे थे।
 खटीमा, टनकपुर तथा मिलिट्री कैंट बनबसा से
फायरब्रिगेड की गाड़ियाँ बुलाई गयीं।
चारों ओर से जलते हुए गेंहूँ के खेतों में
दमकल की गाड़ियोँ पानी की बौछार करतीं रहीं।
एक घण्टे की मशक्कत के बाद आग शान्त हुई।
मगर तब तक आग काफी तबाही मचा चुकी थी।

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